एक उदास बूंद एक बार की बात है, एक छोटा सा बूंद बारिश के बाद, एक बडी सी नदी में गिरी। वह बूंद बड़ी ही उत्साहित थी और अपनी यात्रा का आनंद लेने लगी। वह अपनी यात्रा में नई चीजें देख रही थी और नदी के अन्य बूंदों के साथ मिलकर मस्ती कर रही थी। समय बीतता गया और बूंद को अन्य बूंदों से अलग हो गया। वह अपने आप में एकांत में आ गई और उसका उत्साह ढल गया। वह तन्हा महसूस करने लगी। धीरे-धीरे उसकी ताकत कम हो गई और वह नीचे की ओर डूबने लगी। तभी एक बड़ी सा नदी के किनारे एक छोटा सा पेड़ था। वह पेड़ उसे देखकर पूछता है, "तुम क्यों इतनी उदास हो?" बूंद ने कहा, "मुझे अकेलापन महसूस हो रहा है, मैं नदी में खो रही हूँ।" यूट्यूब पर सुनें: https://youtu.be/M2a2XiPxd_g?feature=shared पेड़ ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम नदी में खो रही हो, लेकिन तुम्हें यह नहीं पता कि तुम एक बड़ा समुद्र हो। तुम अपने असली शक्ति को पहचानने के लिए अपनी अन्तरात्मा की ओर देखो।" बूंद ने पेड़ की बातों को समझा और अपनी असली शक्ति को पहचाना। वह फिर से उत्साहित हो गई और नदी में अपना सफर जारी रखी। इस बार वह अपने ...
क्यों पढ़ें फॉलो शेयर करें विक्रांत राजलीवाल के ब्लॉग? हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे अनुभव आते हैं, जो सिर्फ उसे ही नहीं, बल्कि दूसरों को भी दिशा दिखा सकते हैं। मेरे ब्लॉग्स का मकसद यही है – अपने अनुभवों और संघर्षों के जरिए समाज और युवाओं के लिए एक मार्गदर्शन बनना। मैं हूँ विक्रांत राजलीवाल – एक ऐसा व्यक्ति जिसने 15 वर्ष की उम्र से जीवन सुधार और नशों के खिलाफ जंग शुरू की। 2000 से लेकर आज तक मैंने अपने जीवन में अनगिनत उतार-चढ़ाव देखे, संघर्ष किए और उन्हें पार किया। मेरे ब्लॉग्स में आप पाएँगे ये सब –