नया गीत।
मैं तोता, मैं तोता, लाल चोंच वाला,
हरी मिर्ची का स्वाद भाता चाव से हू मैं खाता।
(अंतर)
हरी मिर्ची की तेज़ी में मज़ा मुझ को आता,
स्वाद उसका जब मेरे लाल चोंच भर जाता।
जब भी खाता, लाल होती ये मेरी चोंच,
जायका लेता हूं मैं, जीवन का,
लाल लाल ये मेरी चोंच।
(स्थायी)
मैं तोता, मैं तोता, लाल चोंच वाला,
हरी मिर्ची का स्वाद भाता चाव से हू मैं खाता।
(अंतर)
देखो मुझे, हरा रंग का गर्व मुझ को,
दिखाता मेरा स्वाभाव जो अनूठा।
जितनी भी हो मुश्किलें, मैं सामना करूं,
यह रंग है मेरी शक्ति, मेरी पहचान का,
मैं तोता, मैं तोता, लाल चोंच वाला,
हरी मिर्ची का स्वाद भाता चाव से हू मैं खाता।
उड़ जाता हूं मैं, नील गगन के पार,
चटकती है जीवन में खुशियों की तब बहार,
सजग रहता हूं, हर बार नए अनुभवों के साथ,
बदलती है जिंदगी का रंग, बदलती है हर पल की धार।
मैं तोता, मैं तोता, लाल चोंच वाला,
हरी मिर्ची का स्वाद भाता चाव से हू मैं खाता।
सूरज की किरणों में उड़ता जा,
आसमान में मिलती है मुस्कान की दस्ताँ।
सपनों का पर्वत चढ़ता उस पार,
ज़िंदगी की नई राह पर, नए संघर्ष का सार।
स्थायी)
मैं तोता, मैं तोता, लाल चोंच वाला,
हरी मिर्ची का स्वाद भाता चाव से हू मैं खाता।
(अंतर)
चमकता हूं जैसे तारों की बारात,
ख्वाबों के पर्वत पे चढ़ता यह मेरा साथ।
नई उड़ानों की हो ध्वनि बारंबार,
जीवन के रंग में खो जा, लिख नई कहानी बार-बार।
स्थायी
मैं तोता, मैं तोता, लाल चोंच वाला,
हरी मिर्ची का स्वाद भाता, चाव से हू मैं खाता।
विक्रांत राजलीवाल
youtube p पर सुने।
https://youtu.be/g3I2B55vcBg?feature=shared
🌟 संघर्ष से सृजन तक – विक्रांत राजलीवाल की प्रेरणादायक जीवन यात्रा कुछ कहानियाँ केवल जीवन की कहानी नहीं होतीं, वे संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है विक्रांत राजलीवाल की, जिन्होंने जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों को झेलकर भी हार नहीं मानी और अपने संघर्ष को ही समाज की सेवा का माध्यम बना दिया। 🔹 15 वर्ष की आयु में लिया जीवन बदलने का निर्णय वर्ष 2000 के अप्रैल महीने में, जब विक्रांत राजलीवाल केवल 15 वर्ष के थे, तब उन्होंने अपने जीवन को सुधारने का एक बड़ा और साहसिक निर्णय लिया। उस समय उन्होंने अपने मन के सारे एहसास अपने पिता जी के साथ साझा किए। पिता जी ने अपने बेटे को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया। इस दौरान विक्रांत को कई तरह की उपचार प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा — तांत्रिकों के पास जाना हकीमों के इलाज डॉक्टरों की सलाह नशा मुक्ति केंद्र लेकिन दुर्भाग्य से इन सब प्रयासों के बावजूद सही परिणाम नहीं मिल पाए। कई बार परिस्थितियाँ इतनी कठिन हो गईं कि जीवन मानो भूत जैसी यातनाओं से गुजर रहा हो। 📚 यातनाओं के बीच पढ़ाई का संकल्प इत...

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