🌼 पारिवारिक शांति ही सच्चा सुख है ✍️ — विक्रांत राजलीवाल आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हमने बहुत कुछ पा लिया है— पैसा, पहचान, मोबाइल, गाड़ियाँ… लेकिन कहीं न कहीं घर की शांति खोती जा रही है। घर, जो कभी सुकून की जगह हुआ करता था, आज बहस, चुप्पी, शिकायत और तनाव का केंद्र बनता जा रहा है। और यही कारण है कि इंसान बाहर से हँसता है, लेकिन भीतर से टूटता चला जाता है। 🕊️ शांति का अर्थ चुप्पी नहीं, समझ है पारिवारिक शांति का मतलब यह नहीं कि घर में कोई बोले ही नहीं। शांति का अर्थ है— एक-दूसरे को समझना, सुनना और सम्मान देना। जहाँ पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं को समझें, जहाँ माता-पिता बच्चों को केवल डाँटें नहीं, बल्कि मार्गदर्शन दें, जहाँ बच्चे भी बड़ों के अनुभवों का आदर करें— वहीं से शांति जन्म लेती है। 🔥 अहंकार: पारिवारिक अशांति की जड़ मेरे अनुभव में, घर टूटते रिश्तों की वजह बड़े अपराध नहीं होते, बल्कि छोटा-सा अहंकार होता है— “मैं सही हूँ”, “मुझे ही समझा जाए”, “वह क्यों नहीं बदले?” जब हर कोई खुद को सही साबित करने में लगा रहता है, तो रिश्ता गलत होने लगता है। 🌱 समाधान भीतर से शुरू होता ...
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